2th शादी ओर इस्लाम

 अव्वल तो इस्लाम में दूसरी शादी की इजाजत हे हुक्म नहीं ओर इजाजत भी कड़ी शर्तों के साथ है. जेसे दोनों बिबयों मैं इन्साफ करना खिलाने पिलाने ओर रात गूजारने में भी. ओर अगर आप को अन्देशा (डर) हो कि इन्सानफ न कर सको गे तो 1 ही लाजिम है........ (وان خفتم ان لا تعدلوا فواحدہ (الآیہ रसूलुल्ललाह ने फरमाया जिसकी 2 बीबयां हों ओर उन मे 1 की तरफ ही ध्यान दे दूसरी पर न दे (यानी उस के खाने पीने खर्च ओर रात गूजारने में बराबरी न करे) ऐसा आदमी कयामत के दिन इस हाल मैं आय गा कि उसका 1 बाजू ( साइड) झुका होगा. 

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