जुल्म आखिरत की बर्बादी हे
जालिमों को अल्लाह के अजाब से कोई न बचा सके गा आर न ही उनका कोई तरफदार होगा. जुल्म से बचो क्युंकी जुल्म कयामत के अन्धेरो मे से 1 अन्धेरा होगा.. कयामत मे हर हक वाले ( मजलूम) को उसका हक दिलवाया जाये गा यहां तक की बगेर सींग वाली(मुन्डी) बकरी का सींग वाली बकरी से बदला दिलवाया जाये गा. यह अलामत हे इस बात की के अल्लाह के यहां जालिमों की खेर नहीं वहां मजलूम को बदले की ताकत भी दी जाये गी और हक भी भले ही दुनिया मे अपनी ताकत के नशे मे दन्दनाते फिर लो मगर यह चन्द रोजा हे. जुल्म सिर्फ यह नहीं की किसी को मारा या सताया जाये बल्कि हर साहिबे इख्तियार व मंसब का अपने इख्तियार ओर उहदे का गलत इस्तेमाल मातहतों पड़ोसियों रिश्तेदारों के हुकूक मे कोताही & हेरा फेरी भी जुल्म हे......
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