मेहमान नवाजी की एहमियत

            जो शख्स अल्लाह ओर आखिरत के दिन पर ईमान रखता हो उसे चाहिए कि मेहमान का इकराम करे ( मेहमान की उम्दा से उम्दा खातिर दारी करे). जो शख्स अल्लाह ओर आखिरत के दिन पर ईमान रखता हो उसे चाहिए कि सिला रेहमी करे ( कराबत दारों रिश्ते दारों के हुकूक अदा करे जरूरत के वक्त उन की माली इमदाद करे & बेहतरीन सुलूक करे) जो शख्स अल्लाह ओर आखिरत के दिन पर ईमान रखता हो उसे चाहिए कि भली बात कहे वर्ना खामोश रहे. मेहमान का हक यह हे की तमाम मशगूलियात को छोड़कर उसे एहमियत दे खन्दा पेशानी (हंस मुख चेहरे) से मिले जाने तक उस की हर जरूरत का ख्याल रखे और जाते वक्त दुआओं के साथ रुखसत करे...... 

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