चंद्रयान 3 पर खुश होना जरूरी या धर्ती पर शांती स्थापित करना जरूरी?

 

इस समय पूरे देश में चंद्रयान 3 के चांद पर सहीह सलामत उतरने की खुशी हे और हर तरफ खुशी का तांता लगा हुआ है और खासकर हमारी सरकार में दूसरों से ज्यादा हिस्सा लेने का जुनून है।

  और मुझे लगता है कि उनमें से कुछ बस एक खास पार्टी की 


इसमें कोई शक नहीं है कि


यह इसरो वैज्ञानिकों की बे मिसाल मेहनत और उनके अंथक प्रयासों का परिणाम है इस पर उन की जितनी सराहना की जाए कम हे और वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्रमा तक पहुंचना किसी भी देश के लिए बहुत गर्व की बात है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि देश के विकास से देश के प्रत्येक नागरिक को दिली खुशी होती हे इसी कारण हर व्यक्ति स्वाभाविक रूप से खुश है और होना भी चाहिए 

परन्तु 

सवाल यह है की

अरबों रुपये खर्च कर चांद तक पहुंच ही विकास का पैमाना है? 

मणिपुर में मानवता मर रही है.

तीन महीने से ज्यादा समय से हत्या और खून का बाजार गर्म है, कितने ही परिवार बर्बाद हो गए हैं,

 देश में बेरोजगारी आम है,

  हर साल मॉब लिंचिंग में सैकड़ों लोग मारे जाते हैं,दंगों में हजारों परिवार बर्बाद हो जाते हैं,

 हर साल न जाने कितने किसान आत्महत्या कर लेते हैं, हर साल सैकड़ों महिलाओं की इज्जत नीलाम हो जाती है,रिश्वतखोरी का बोलबाला है,

 देश बेहाल है कर्ज़ बोझ बनता जा रहा है, कोरोना में कुप्रबंधन से मर रहे लोग, गंगा में सड़ती और तैरती लाशों को कोई कवर नहीं करता,

 न्याय करने वाले जजों और अधिकारियों का तुरंत तबादला हो जाता है, अपराधी आराम से संसद और विधानसभाओं में चुन लिए जाते हैं। आते हैं , लोगों की गाढ़ी कमाई के अरबों डॉलर आराम से उड़ जाते हैं, नफरत का बाजार गर्म है शिक्षा को वेपार बना दिया गया गया है,

 भुखमरी आम बात है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार आज भी देश में 80 करोड़ गरीब लोग 5 किलो सरकारी राशन से गुजारा कर रहे हैं । 77 साल में भी देश की एक बड़ी आबादी साफ पानी से वंचित है।

 सरकारें पूंजीपतियों की गुलाम बनती जा रही हैं। देश की एक बड़ी आबादी आज भी बुनियादी शिक्षा से वंचित है, इस कदर उलझी हुई है जाति की बेड़ियाँ कि कोई नीची जाति का व्यक्ति घोड़ी पर नहीं चढ़ सकता, जरा सी बात पर एक खास जाति और धर्म को मानने वालों के घरों पर बुलडोजर चला दिया जाता है। गरीबों के मुँह पर पेशाब करना, उनसे जूते चटवाना  आम सी बात है। , सार्वजनिक रूप से मुसलमानों को मारने की धमकी देना।

नफरत इतनी है कि हिजाब और नकाब पहन्ने वाली महिलाओं को शिक्षा से वंचित करने के लिए कानून बनाए जा रहे हैं, कभी एक ही धर्म के मान्ने वालों का जीवन काल छोटा करने के लिए उन्हें लव जिहाद के बहाने बदनाम किया जाता है, तो कभी उसी धर्म  पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जाती है धार्मिक स्वतंत्रता का दमन किया जा रहा है, 

हमारा मीडिया एक खास मानसिकता के तहत काम करता है, धार्मिक जुलूस के नाम पर रैलियां निकाली जाती हैं, फिर अवैध हथियारों से लैस भीड़ मस्जिदों में पहुंचती है  भगवा झंडे लहराती है और नफरत भरे नारे लगाती है. और जब विरोध करते हैं तो नरसंहार करते हैं और पुलिस तमाशबीन बनी रहती है, फिर पीड़ित वर्ग को ही गिरफ्तार किया जाता है और उनके घर तोड़ दिये जाते हैं, लेकिन अदालतें खामोश रहती हैं, पुलिस की मौजूदगी में भीड़ को तलवार और अन्य हथियार देकर नरसंहार के लिए उकसाया जाता है। पंचायतें आयोजित की जाती हैं और मुसलमानों के बहिष्कार की घोषणा की जाती है, 

चलती ट्रेन में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं। अपराधियों का स्वागत किया जाता है,

जब तक भूमि सुधार नहीं होते, जब तक लोग समृद्ध जीवन जीने नहीं लगते, प्रत्येक नागरिक को शांति और व्यवस्था नहीं मिलती, देश के प्रति घृणा समाप्त नहीं होती।

तब तक विकास का ढोल बजाना आत्मसंतुष्टि के अलावा कुछ नहीं है

  देश की भूमि व्यवस्था को नष्ट होने से बचाना, देश की एकता को मजबूत करना, देश के लोकतंत्र को मजबूत करना, धर्म के नाम पर नफरत के जहर का तोड़ निकालना ज्यादा जरूरी है। 

चंद्रमा पर जाएं और वहां बस्तियां बसाएं। बहूत अच्छी बात हे 

 लेकिन देश को भेदभाव और जाति की राजनीति से मुक्त किया जाना चाहिए, धार्मिक स्वतंत्रता को स्थिर किया जाना चाहिए और कानून का शासन मजबूत किया जाना चाहिए, न्यायिक प्रणाली को मजबूत किया जाना चाहिए, देश में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को एक अधिकार मिलना चाहिए।

 पर्याप्त भोजन वाला घर, और दंगों की अंतहीन श्रृंखला को समाप्त करने का समाधान खोजा जाना चाहिए। देश की शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली दुनिया के लिए एक उदाहरण होनी चाहिए और रिश्वतखोरी का अंत विकास का सबसे बड़ा मानक होगा, फिर खुशी चांद पर जाने का सफर दोगुना हो जाएगा.

  ईश्वर करे देश हर क्षेत्र में उन्नति करे, हर क्षेत्र में उन्नति हो, सर्वत्र शांति और सुरक्षा हो 

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